भारत की प्रशासनिक व्यवस्था क्या है: समझें और जानें (Bharat Ki Prashasnik Vyavastha Kya Hai)

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भारत की प्रशासनिक व्यवस्था क्या है? (Bharat Ki Prashasnik Vyavastha Kya Hai) | भारत में प्रशासनिक व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी किसकी होती है? | भारत की प्रशासनिक व्यवस्थाओं का इतिहास और विकास स्वतंत्रता के बाद कैसे हुआ? | भारत के प्रशासनिक राजधानी क्या है? | भारतीय प्रशासनिक व्यवस्था आदि जैसे प्रश्नों के बारे में संपूर्ण जानकारी इस आर्टिकल में पढ़े।

आपने अवश्य ही भारतीय प्रशासनिक व्यवस्था का नाम सुना ही होगा लेकिन भारत की प्रशासनिक व्यवस्था क्या है? इसके बारे में कुछ लोग नहीं जानते हैं, लेकिन बहुत से लोगों को जानकारी होती है।

उदाहरण के तौर पर कहे, तो आपने देखा होगा कि जैसे ही समाज में किसी प्रकार की घटना होती है, तो लोग हमारे प्रशासनिक व्यवस्था को जिम्मेदार कहते हैं।

लेकिन आखिरकार यह प्रशासनिक व्यवस्था है, क्या? लोग प्रशासन को ही क्यों जिम्मेदार ठहराते हैं, समाज में होने वाले सभी अच्छे बुरे कामों के लिए इसके बारे में आज के इस आर्टिकल में हम विस्तार पूर्वक जानेंगे।

हमारे आर्टिकल में अंत तक बन रहे हम आपको भारत की प्रशासनिक व्यवस्था क्या है? एवं भारत की प्रशासनिक व्यवस्था के बारे में संपूर्ण सभी प्रकार की जानकारी हम बताने वाले है, इसलिए हमारे आर्टिकल को ध्यानपूर्वक पढ़े।

भारत की प्रशासनिक व्यवस्था क्या है: समझें और जानें (Bharat Ki Prashasnik Vyavastha Kya Hai)
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भारत की प्रशासनिक व्यवस्था क्या है? – (Bharat Ki Prashasnik Vyavastha Kya Hai)

हमारे भारत के प्रशासनिक व्यवस्था हमारे भारत के कानून का एक महत्वपूर्ण पहलू है, यह सुनिश्चित करता है कि भारतीय संविधान के अनुसार भारत के सभी नागरिक और सरकारी अधिकारी अपने कामों व अधिकारों का दुरुपयोग नहीं करते हैं।

अगर आम भाषा में कहा जाए तो भारत के प्रशासनिक व्यवस्था सभी आम आदमियों के लिए सामाजिक सुरक्षा एवं सामाजिक कल्याण करने का काम करता है।

जैसे हमारे समाज में हो रहे सभी प्रकार के कानूनी कामों के लिए हमारे भारत की प्रशासनिक व्यवस्था ही जिम्मेदार होती है। अर्थात हमारे प्रशासन व्यवस्था का काम यह सुनिश्चित करना है, कि हमारे भारत में रह रहे सभी लोगों का आर्थिक एवं सामाजिक रूप से विकास हो।

भारतीय प्रशासनिक व्यवस्था

  • हमारे भारत की वर्तमान 2023 की प्रशासनिक व्यवस्था एकात्मक विशेषताओं वाली संसदीय सांसद व्यवस्था है।
  • भारतीय प्रशासनिक सेवा यानी आईएएस, भारतीय प्रशासनिक व्यवस्था की महत्वपूर्ण सिविल सेवा माना जाता है।
  • भारतीय प्रशासनिक सेवा हमारे भारत की स्थाई प्प्रशासनिक व्यवस्था का हिस्सा है।
  • हमारी भारतीय प्रशासनिक व्यवस्था ने ब्रिटिश प्रशासनिक प्रणाली से कई चीजों को अपनाया है जैसे संसदीय प्रणाली, न्यायिक प्रणाली और कानून, जो आज के वर्तमान समय में भी हमारे भारतीय प्रशासनिक व्यवस्था में मौजूद हैं।

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स्वतंत्रता के पश्चात भारत की प्रशासनिक व्यवस्था

भारत की प्रशासनिक व्यवस्था का उद्देश्य सामाजिक कल्याण और सुरक्षा सुनिश्चित करना है। हमारे भारत के प्रशासनिक व्यवस्था में स्वतंत्रता के पश्चात, ही ये सभी परिवर्तन आए हैं। क्योंकि स्वतंत्रता के पहले ब्रिटिश सरकार केवल अपना फायदा एवं ब्रिटिशवाशियो के फायदे के लिए ही प्रशासन के नियम बनाती थी।

लेकिन स्वतंत्रता के बाद हमारी प्रशासनिक व्यवस्था में कई सारे परिवर्तन आते गए जिससे हमारी प्रशासनिक व्यवस्था बहुत बेहतर होती गई और इनका मुख्य उद्देश्य भारत के लोगों का हित करना हुआ।

भारतीयों का हित करने के लिए हमारी भारतीय प्रशासनिक व्यवस्था ने कई सारे कानूनी नियम एवं कई सारे संस्था बनाए जो हमारे भारत के लोगों की हित के लिए हो।

अब आपके मन में सवाल आएगा, कि यह परिवर्तन आने की वजह क्या है?, आखिर ऐसा मुख्य रूप से क्या हुआ जो भारत की प्रशासनिक व्यवस्था में स्वतंत्रता के बाद अचानक इतना परिवर्तन आया।

स्वतंत्रता के पश्चात हमारे भारत के प्रशासनिक व्यवस्था में मुख्य रूप से निम्न कारण से परिवर्तन आए है, जिन्हें हम कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं के द्वारा जानते हैं।

  • संसदीय शासन व्यवस्था का सूत्रपात, भारत की प्रशासनिक व्यवस्था में परिवर्तन आने का पहला यह मुख्य कारण है।
  • प्रशासन के goals और motive में परिवर्तन स्वतंत्रता के बाद हुआ, जिस कारण हमारी प्रशासनिक व्यवस्था में परिवर्तन आया।
  • स्वतंत्रता के पश्चात ही संघात्मक शासन व्यवस्था की स्थापना की गई।
  • जनप्रतिनिधियों की प्रशासन में भागीदारी लेने से भी कुछ परिवर्तन आए हैं।

हमारे भारत की प्रशासनिक व्यवस्था मे विकास होने के लिए यह चार मुख्य कारण, मुख्य रूप से उत्तरदाई है।

अब हम भारत की इन चारों मुख्य प्रशासनिक व्यवस्था के लिए जिम्मेदार होने वाले कारण के बारे में विस्तार पूर्वक जानेंगे, आखिरकार किस प्रकार इन चार कारण से हमारे भारत के प्रशासनिक व्यवस्था बेहतर हुई है।

#1. संसदीय शासन व्यवस्था का सूत्रपात होने के कारण आने वाले परिवर्तन

स्वतंत्रता के पश्चात हमारे भारत में संसदीय शासन व्यवस्था आने के कारण हमारे भारत की प्रशासनिक व्यवस्था में बहुत सारे परिवर्तन आए।

जब ब्रिटिश शासन था तब कार्यपालिका विधायिका के प्रति उत्तरदाई नहीं थी, वह केवल ब्रिटिश लोगों के प्रति उत्तरदाई थी कि ब्रिटिश लोगों का सामाजिक एवं आर्थिक रूप से पूर्ण विकास हो सके।

इसलिए अगर अन्य शब्दों में कहा जाए तो इनका मुख्य दायित्व ब्रिटिश शासन का विकास करना था।

लेकिन जब हमारे भारत में स्वतंत्रता के बाद हमारी भारतीय प्रशासनिक व्यवस्था शुरू हुई तो हमारे भारत की कार्यपालिका को संसद के प्रति उत्तरदाई बना दिया गया।

जिससे हमारे भारतीय समाज की प्रशासनिक व्यवस्था बेहतर हो सके इसके लिए हमारी कार्यपालिका को संसद के प्रति उत्तरदाई बना दिया गया। इसके बाद संसद के द्वारा सभी प्रकार के नियमों एवं प्रशासनिक व्यवस्था को जनहित के लिए उपयोग में किया जाता है।

#2. प्रशासन के लक्ष्य एवं उद्देश्यों में परिवर्तन स्वतंत्रता के बाद किया गया

भारतीय प्रशासन का मुख्य लक्ष्य केवल कानून व्यवस्था बनाए रखना नहीं था बल्कि हमारे भारत का आर्थिक एवं सामाजिक दृष्टिकोण से पूर्ण रूप से विकास करना था।

हमारे संविधान की प्रस्तावना एवं नीति निर्देशक तत्व में एक अध्याय में बताया गया है कि हमारे प्रशासनिक लक्ष्य और उद्देश्य क्या है।

अध्याय के अनुसार हमारी प्रशासन का लक्ष्य लोक कल्याण के लिए कार्य करना है जबकि ब्रिटिश सरकार के समय प्रशासन नौकरशाही वृति में कार्य करती थी, अर्थात आम जनता को नौकर के जैसे रखा जाता था।

#3. संघनात्मक शासन व्यवस्था की स्थापना स्वतंत्रता के बाद किया गया

स्वतंत्रता के पूर्व हमारी सरकार एकात्मक सरकार थी, लेकिन स्वतंत्रता के बाद इस सरकार को संघात्मक शासन व्यवस्था में परिवर्तित कर दिया गया।

सभी राज्य सरकारों को उनका पूर्ण स्वत: प्रदान किया गया, इस तरह राज्य के सभी जगह पर केंद्रीय नियंत्रण कम हुआ।

#4. जनप्रतिनिधियों की प्रशासन में भागीदारी हुई

स्वतंत्रता के बाद प्रशासन निर्णय प्रक्रिया में आम लोगों की भी भागीदारी हुई है अर्थात अगर आसान भाषा में कहूं तो किसी भी राज्य के मुख्यमंत्री का निर्वाचन चुनाव जब होता है तो उसे राज्य की जनता ही वोट देकर मुख्यमंत्री को चुनती है।

अर्थात यह जनप्रतिनिधियों की प्रशासनिक व्यवस्था हुई, ब्रिटिश कार्य प्रणाली जब थी तब किसी प्रकार का चुनाव एवं उन लोगों के पास किसी प्रकार के राजनीतिक जिम्मेदारियां भी नहीं होती थी।

उनका उत्तरदायित्व केवल गवर्नर जनरल के प्रति था, गवर्नर जनरल उन्हें जो भी ऑर्डर देता वह आर्डर उन्हें पूरा करना होता था।

लेकिन जब से स्वतंत्रता हुई तब से हमारे भारत में कई सारे परिवर्तन आते गए, हमारे भारत में प्रशासन की फिलॉसफी, इकोलॉजी और उसके तत्व में परिवर्तन आए।

हमारे भारत में लोकतांत्रिक दृष्टि से भारतीय शासन के जनतांत्रिक विचारों और विचार दर्शन के कारण ही प्रभाव हमारी प्रशासनिक व्यवस्था पर पड़ा।

इस समय मुख्य रूप से प्रशासन तंत्र पर विकास की जिम्मेदारी सौंप गई, इस समय विकास का अर्थ था कि पूरे देश का आर्थिक एवं सामाजिक रूप से विकास होना।

लेकिन इस समय केवल आर्थिक एवं सामाजिक विकास ही मुख्य लक्ष्य नहीं था बल्कि इसके अलावा भी अन्य बहुत से मुख्य लक्ष्य से जो हमारी भारतीय प्रशासनिक व्यवस्था को बेहतर करने थे ।

जैसे मुख्य रूप से सबसे महत्वपूर्ण का इन दोनों लक्षण के अलावा गरीबी थी, क्योंकि जब अंग्रेज बार भारत आए थे तो भारत से अधिक से अधिक धन लेकर गए थे, इसलिए हमारे भारत में गरीबी आ गई थी।

जिसे ठीक करने के लिए हमारे भारत सरकार ने कई प्रकार के प्रशासनिक व्यवस्थाओं के कार्यालय एवं विभाग बनाएं जो मुख्य रूप से पूरे भारत की प्रशासनिक व्यवस्था के सभी पहलुओं पर काम कर सके।

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भारत की प्रशासनिक व्यवस्था की विशेषताएं

भारत के संविधान में भारत की प्रशासनिक व्यवस्था के उद्देश्य और विशेषताएं बताई गई हैं।

सभी पारंपरिक दायित्व के साथ आज हमारी भारतीय प्रशासनिक व्यवस्था समाज सेवा, नगर आपूर्ति एवं औद्योगिक क्षेत्र में हमारा भारतीय लोक प्रशासनिक व्यवस्था एक नया क्षेत्र ग्रहण कर रहा है।

अगर आज के समय में हमारे भारत की लोक प्रशासनिक व्यवस्था के बारे में बात की जाए तो उनकी निम्न प्रकार से विशेषताएं हैं।

#1. विकसित प्रशासन

हमारी भारतीय प्रशासन क्रमिक विकास का ही परिणाम है। जो हमारे इतिहास के सभी मोड़ की तरह परिवर्तित होता हुआ, गंगा की धाराओं की तरह समाज एवं निरंतर गतिमान है।

कई सारे विद्वानों के अनुसार जिस प्रकार ऋग्वेद सबसे पुराना वेद माना जाता है ठीक उसी प्रकार हमारे भारत के प्रशासनिक व्यवस्था उतनी पुरानी व्यवस्था है।

इसलिए हम अपने प्रशासन को क्रमिक विकास का परिणाम कह सकते हैं, जिस प्रशासन में मौर्य काल, मुगल काल एवं ब्रिटिश काल की झलक दिखाई देती है।

हालांकि आज के समय में यह समय के साथ विकसित होता जा रहा है।

#2. गतिशील एवं परिवर्तनशील प्रशासन

हमारे भारत के प्रशासनिक व्यवस्था प्रगतिशील, गतिशील और परिवर्तनशील गुन से युक्त प्रशासन व्यवस्था है।

पुराने समय में प्रशासनिक व्यवस्था जनता को सेवक की तरह समझा जाता था लेकिन आज के समय में प्रशासनिक व्यवस्था जनता का सेवक है जो जनता के हित के लिए कार्य करता है।

समय के साथ हमारे भारत के प्रशासनिक व्यवस्था में कई प्रकार के परिवर्तन आते गए जो हमारे भारत के हित के लिए हैं।

#3. उत्तरदाई प्रशासन

हमारे भारत में संसद प्रणाली की स्थापना की गई अर्थात हमारे भारत में संसद के सदस्य हमारे आम जनता के द्वारा निर्वाचित किए जाते हैं।

मंत्रिमंडल भारत की संसदीय व्यवस्था के प्रति उत्तरदाई होता है, हमारे भारत में मंत्रिमंडल के सदस्य विभिन्न प्रशासनिक विभागों के अध्यक्ष होते हैं।

संसद में इन्हीं सभी विभागों के अध्यक्ष से प्रश्न पूछे जाते हैं, केवल इतना ही नहीं उनके विभागों की आलोचना तक की जाती है कि उनके द्वारा क्या विकास हुआ है?

मंत्रियों के माध्यम से संसद हमारे भारत की संसदीय प्रणाली अर्थात प्रशासनिक व्यवस्था पर नजर रखती है।

#4. लालफीताशाही

हमारे भारतीय प्रशासनिक व्यवस्था की एक विशेषता लालफीताशाही है, इसमें अधिकारी और कर्मचारी नियमों और विनिमय पर अधिक बल देते हैं।

यह प्रत्येक काम सुनिश्चित प्रक्रियाओं द्वारा ही संपन्न करते हैं, और यह उचित कार्य प्रणाली से कम करना पसंद करते हैं।

अत्तः अगर यह काम ना करें, तो फाइलें इधर से उधर घूमते रह जाएगी और समय पर किसी का काम नहीं होगा।

#5. राजनीतिक तटस्थता

हमारे भारत में लोक प्रशासन राजनीतिक दृष्टि से तटस्थ है, हमारे भारतीय प्रशासन के सदस्य राजनीतिक निर्देशों का पूर्ण सख्त नियम से पालन करते हैं ।

संविधान की राजनीतिक तटस्थता भारत सरकार के संविधान के द्वारा ही निर्धारित की गई है।

#6. विशाल आकार

हमारे भारत की में प्रशासनिक व्यवस्थाओं के आकार की बात की जाए तो यह काफी व्यापक है, हमारे भारत की प्रशासनिक व्यवस्था बहुत बड़ी है।

भारत के प्रशासनिक व्यवस्था में एकरूपता का अभाव भी है क्योंकि यह एक संघनात्मक प्रशासनिक व्यवस्था है।

स्वतंत्रता के पश्चात हमारे भारत में सरकारी कर्मचारियों की संख्या बढ़ते जा रही है, नए-नए विभाग बढ़ते जा रहे हैं एवं पुराने विभागों का विस्तार हो रहा है।

हमारी सरकार भारत की प्रशासनिक व्यवस्था को बढ़ाने में अपना पूर्ण योगदान दे रही है, द्वितीय वेतन आयोग के अनुमान के अनुसार 30 जून 1947 को केंद्र सरकार की सेवा में 17.37 लाख कर्मचारी थे।

जिनकी संख्या में बढ़ोतरी हर साल होते रहती है, जनवरी 1971 में 29.81 लाख कर्मचारी हो गए।

2006 में 3082289 कर्मचारी हो गए और अगर आज के वर्तमान समय 2023 की बात की जाए तो आज की जनसंख्या को देखते हुए केंद्र सरकार के अंतर्गत कर्मचारियों की संख्या बहुत है।

#7. प्रशासन का लक्ष्य सामाजिक आर्थिक न्याय

भारत के प्रशासनिक व्यवस्था का लक्ष्य सामाजिक एवं आर्थिक न्याय नीतियों पर काम करना है। हमारे संविधान में भारत की प्रशासनिक व्यवस्था का मुख्य लक्ष्य सामाजिक और आर्थिक विकास पर काम करना दिया गया है।

#8. विविधता की कमी

हमारी भारतीय प्रशासनिक व्यवस्था में हमेशा विविधता की कमी की आलोचना की जाती है, सकारात्मक कार्य प्रणाली के द्वारा इस कमी का निवारण आज के समय में किया जा रहा है।

केवल इतना ही नहीं इसके अलावा भी अन्य बहुत सारी अनगिनत विशेषताएं हमारी भारतीय प्रशासनिक व्यवस्थाओं की है।

लेकिन मैंने आपको कुछ मुख्य प्रशासनिक व्यवस्थाओं के बारे में बताया है, जिससे आपको भारत की प्रशासनिक व्यवस्थाओं के उद्देश्य का अंदाजा हो सके।

भारत की प्रशासनिक राजधानी क्या है?

प्रशासनिक राजधानी वह होती है, जिस क्षेत्र में उसे देश या राज्य का प्रशासन होता है। अगर भारत की प्रशासनिक राजधानी की बात की जाए तो हमारे भारत के प्रशासनिक राजधानी दिल्ली है।

दिल्ली में हमारे भारत की पूर्ण प्रशासनिक व्यवस्था निवास करती है, अर्थात हमारे भारत की प्रशासनिक व्यवस्था की मुख्य जिम्मेदारियां के लिए दिल्ली केन्द्र शासित प्रदेश ही जिम्मेदार होता है।

क्योंकि दिल्ली में ही हमारे भारत के प्रशासनिक व्यवस्था निवास करती है, अब सवाल आता है कि दिल्ली ही क्यों भारत की प्रशासनिक व्यवस्था है?

पुराने समय में अंग्रेजों ने भारत की प्रशासनिक राजधानी कोलकाता से दिल्ली इस लिए किया गया था क्योंकि भारत की प्रशासनिक व्यवस्थाओं में संचालन दिल्ली से बेहतर तरीके से किया जा सकता है।

इसलिए आज के वर्तमान समय में भी भारत की प्रशासनिक राजधानी दिल्ली ही है।

निष्कर्ष | भारत की प्रशासनिक व्यवस्था क्या है?

आज के इस आर्टिकल में हमने आपको भारत की प्रशासनिक व्यवस्था क्या है? इससे जुड़ी सभी प्रकार की जानकारी दी है।

मैंने आपको भारत की प्रशासनिक व्यवस्था में स्वतंत्रता के बाद क्या विकास आया या भारत के प्रशासनिक व्यवस्था स्वतंत्रता से पहले कैसी थी? सभी के बारे में विस्तार पूर्वक विवरण भी बताया है।

केवल इतना ही नहीं इसके अलावा भी मैने  भारत के प्रशासनिक राजधानी क्या है, भारतीय प्रशासनिक व्यवस्था 2023, भारत की प्रशासनिक व्यवस्था की विशेषताएं क्या होती है, भारत के प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्न आदि के बारे में विस्तार पूर्वक विवरण इस आर्टिकल के द्वारा बताया है।

आशा करती हूं कि मेरे द्वारा दी गई जानकारी आपको पसंद आई होगी अगर आपके पास इस आर्टिकल से जुड़े कोई भी प्रश्न हो तो कमेंट करके मुझे अवश्य पूछे हमारे आर्टिकल में अंत तक बने रहने के लिए आपका धन्यवाद।

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